सोगवारों ने मनाया कर्बला के शहीदों का चेहलुम
- इमामाबाड़ा शाबान मंजिल व लाडली मंजिल में मजलिस आयोजित
बस्ती। कर्बला के शहीदों का चेहलुम मंगलवार को मनाया गया। इमामबाड़ा शाबान मंजिल व लाडली मंजिल में मजलिसों का आयोजन कर अकीदतमंदों ने इस्लामी इतिहास की उस अजीम कुर्बानी को याद किया और आसूं बहाए। आज से लगभग 14 सौ साल पहले इराक के कर्बला नामक स्थान पर सीरिया के शासक यजीद इब्ने माविया ने पैगम्बरे-इस्लाम के नवासे इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों को तीन दिन तक भूखा प्यासा रखने के बाद शहीद कर दिया था।
मौलाना अबुजर ने मजलिस को खिताब फरमाते हुए कहा कि यजीद उस खानदान की औलाद था, जिन लोगों ने मक्का की फतह के बाद इस्लाम कबूल किया था। मुसलमान की भेष में छिपे हुए यह लोग हमेंशा पैगम्बर व उनकी औलादों के खून के प्यासे रहे। मौला अली, इमाम हसन को ऐसे बागियों से जंग लड़नी पड़ी।
यजीद चाहता था कि अगर हुसैन उसे अपना खलीफा मान लें तो वह अपने बुजुर्गो की मंशा के अनुसार इस्लाम की मौजूदा सूरत को बिगाड़ कर रख दे। फिर कोई अल्लाह व रसूल का नाम लेवा नहीं बचता। सामंतवादी व्यवस्था फिर से शुरू हो जाती।
इमाम ने कुर्बानी देना कबूल किया लेकिन नाना के दीन को मिटने नहीं दिया। उन्होंने कहा कि पैगम्बर के हकीकी वारिस अली व औलादे अली ही थे।
यजीदी जुल्म को बयान करते हुए कहा कि इमाम की शहादत के बाद उनके घर वालो ंको कैद कर लिया गया। महिलाओं के सिरों से चादर तक छीन ली गई और उनके हाथों को बांध दिया गया। यजीद ने अपने दरबार में इमाम के घर वालों को खड़ा रखा। ऐसे अवसर पर हजरत जैनब व इमाम जैनुल आब्दीन ने यजीद की करतूतों को बेनकाब करते हुए खुद का परिचय लोगों से कराया तो धीरे-धीरे लोग यजीद से नफरत करने लगे। यही कारण रहा कि यजीद के खानदान बनी उमैया का नामोनिशान दुनिया से मिट गया, जबकि हुसैनी परचम आज भी लहरा रहा है।
मो. रफीक, जीशान रिजवी, शम्स आबिद, सफदर रजा, मोहम्मद मेंहदी, हाजी अनवार काजमी, फरहत हुसैन, अयान रिजवी, हसनैन रिजवी, अन्न्ाू, तकी हैदर, अरशद आबिद, शमसुल हसन काजमी, मेराज हैदर, सुहेल हैदर, सोनू सहित अन्य मौजूद रहे।




