हास्य व्यंग रचना
हे प्रभो जीवन दाता प्रार्थना मेरी सुन लीजिए
दे दीजिए प्रधानी मुझे फिर गांव मिटने दीजिए
गांव की चिंता नहीं विकास को धिक्कार है
अब रक्त जन का चूस लूं मिल गया अधिकार है
यह गांव जाऐ भाड़ में वेतन व्यवस्था कीजिए
हे प्रभो जीवनदाता प्रार्थना मेरी सुन लीजिए
मधुर कहते हैं कि नाली सड़क टूटने दीजिए
बन जाएं मालामाल बस प्रधानी सार्थक होने दीजिए
(देवेंद्र कुमार द्विवेदी 'मधुर')

