भारत में मंकीपॉक्स की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जारी की एडवॉयजरी

 भारत में मंकीपॉक्स की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जारी की एडवॉयजरी

बस्ती। भारत में मंकीपॉक्स की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एडवायजरी जारी की है। अमेरिका व यूरोप सहित 30 देशों में मंकीपॉक्स के मामले पाए जाने के बाद से भारत तक इस वायरस के पहुंचने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। मंकीपॉक्स के लक्षण देश में पहले से मौजूद चिकनपॉक्स बीमारी से मिलते-जुलते होने के कारण सरकारी व निजी चिकित्सकों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। उनसे कहा जा रहा है कि अगर किसी मरीज में मंकीपॉक्स के लक्षण मिलते हैं तो तत्काल उसे आईसोलेशन में रखने का प्रबंध करें तथा इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग के स्थानीय अधिकारियों को दें।

आईडीएसपी के जिला सर्विलांस ऑफिसर डॉ. सीएल कन्नौजिया का कहना है कि मंकीपॉक्स वैश्विक महामारी है। सभी स्वास्थ्य कर्मियों को अलर्ट कर दिया गया है। अगर कोई संदिग्ध मरीज मिलता है तो उसे आईसोलेट कराकर उसकी सैम्पलिंग कराई जाएगी। डॉ. कन्नौजिया का कहना है कि इस मौसम में चिकनपॉक्स बीमारी के बढ़ने का खतरा रहता है। दोनों बीमारियों के कुछ लक्षण सामान्य होने के कारण चिकित्सकों को इस समय विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। विदेश से आने वालों पर विशेष नजर रखने की जरूरत है।

खून और यूरिन की भी होगी सैम्पलिंग

किसी मरीज में मंकीपॉक्स के लक्षण पाए जाने पर उसकी सैम्पलिंग कराई जाएगी। यह सैम्पलिंग कोरोना की तरह नाक और गले की होगी। इसी के साथ मरीज के शरीर पर पड़े हुए दाने के पानी का भी सैम्पल लिया जाएगा। मरीज के खून और यूरिन की भी सैम्पलिंग होगी। सैम्पल को पुणे स्थित एनआईवी लैब भेजा जाता है।

वॉयरल जूनोटिक बीमारी है मंकी पॉक्स

मंकीपॉक्स एक वॉयरल जूनोटिक अर्थात पशु पक्षियों से फैलने वाली बीमारी है। यह मुख्य रूप से मध्य और पश्चिम अफ्रीका के उष्ण कटिबंधीय वर्षा वन क्षेत्रों में होती है। कभी-कभी अन्य क्षेत्रों में भी रोग का प्रसार हो जाता है। मंकीपॉक्स का फिलहाल कोई इलाज नहीं है। यह वायरल बीमारी है। इसका संक्रमण दो से चार सप्ताह में खुद ही समाप्त हो जाता है। चिकित्सक की सलाह पर दवाएं लेते रहना चाहिए। कोई समय से जांच व इलाज न होने से कुछ मरीज गंभीर स्थिति में भी पहुंच हो जाते हैं। मृत्युदर एक से 10 प्रतिशत तक हो सकती है। विश्व में किसी के इस रोग से मृत्यु की सूचना इस बार अभी तक नहीं है।

कैसे फैलती है यह बीमारी

मंकीपॉक्स जानवरों से मानव में तथा एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है। इसका वायरस कटी-फटी त्वचा (भले ही वह दिखाई न दे रही हो) सांस की नली, म्यूकोसा (आंख, नाक या मुंह) के माध्यम से दूसरे व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर सकता है। जानवरों से मानव में इसका संचरण संक्रमित जानवर के काटने, खरोचने, जंगली जानवर का मांस खाने, शरीर के घाव से निकल रहे पदार्थ के संपर्क में आने, दूषित बिस्तर का प्रयोग करने से भी हो सकता है। मानव से मानव में इसका संचरण बड़े आकार के रेस्पॉयरेटरी ड्रापलेट के माध्यम से संक्रमित के संपर्क में लंबे समय तक रहने से होता है। शरीर पर चकत्तों के दिखने से लेकर चकत्तों की पपड़ी गिरने तक व्यक्ति संक्रामक बना रहता है।

यह है बीमारी के लक्षण

- तेज बुखार आना।

- शरीर पर पानी भरे दानें हो जाना।

- शरीर में गांठ पड़ जाना।


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