तीन बार बैठक बुलाने के बाद भी पाऊं गांव में नहीं हो पाया कोटे का चयन
(ज्ञानचन्द द्विवेदी)
गायघाट। विकास खण्ड कुदरहा के ग्राम पंचायत मे उचित दर बिकेता के लिए बार,बार बैठक बुलाई जाती है बैठक को स्थगित कर दिया जाता है क्योकि मन मुताबिक काम नही हो पा रहा है ।जिम्मेदारो के नाक के नीचे यह खेल हो रहा है लेकिन जिम्मेदार कान और आख बन्द किये हुये है। पाऊं में प्रधान पति द्वारा 4 माह पूर्व सरकारी सस्ते गल्ले की दूकान छोड़ने के बाद रिक्त हुए कोटे पर पूर्व नियोजित कार्यक्रम के अनुसार कोटे के चुनाव हेतु गहमागहमी के बीच रविवार को लगातार तीसरी बार बैठक का आयोजन किया गया। एडीओ आईएसबी के नेतृत्व और ग्राम पंचायत अधिकारी अजीत कुमार सिंह के देखरेख में शुरू हुए चुनाव को कुछ ही देर में झगड़ा फसाद दिखाकर अगली तिथि के लिए स्थगित कर दिया गया। कोटेदार पद के चुनाव में राघवेन्द्र शुक्ल और सचिन त्रिपाठी ने दावेदारी पेश की थी,
राघवेंद्र शुक्ल के पक्ष मे लगभग 90 प्रतिशत से अधिक लोग रहे लेकिन दबी जुबान से लोगों ने बताया कि यह ग्राम प्रधान के पक्ष नही है इसलिए यह खेल किया जा रहा है। ग्राम प्रधान अपने चहेते को कोटेदार बनाना चाहते है लेकिन मजबूरी यह है कि उनके पक्ष मे बहुमत नही है।
ग्रामवासी प्रमिला, सुगंधा, पुनीता गुप्ता, उर्मिला, शारदा देवी अभिषेक पाण्डेय, पवन दूबे, अम्बिका दूबे, भोला शुक्ल, राघवेंद्र शुक्ला, हजारीलाल भारती, हरिश्चंद्र यादव, लाल जी गुप्ता, सोहन गुप्ता, तुलसीराम गुप्ता का आरोप है कि कोटा चयन को लेकर लगातार तीन बार 17 फरवरी, 27 फरवरी और 5 मार्च को ग्राम पंचायत पाऊं के राजस्व गांव से भारी संख्या में जनता आती है लेकिन कोई ना कोई कारण दिखाकर चुनाव निरस्त कर दिया जाता है। तीनों बार ग्राम पंचायत के अस्सी फीसदी से ज्यादा लोगों ने राघवेंद्र शुक्ल के पक्ष में हाथ उठाकर कोटेदार बनाने के लिए अपना मत दिया इसके बावजूद ब्लॉक कर्मियों द्वारा कोई न कोई कारण दिखाकर चुनाव निरस्त कर दिया जाता है। जिसे ग्रामीणों में रोष व्याप्त है। खासकर महिलाओं को दूसरे गांव जाकर राशन लाने में बहुत दिक्कत होती है। इस सम्बन्ध में खण्ड विकास अधिकारी आशुतोष तिवारी से बातचीत करने का प्रयास किया गया किन्तु फोन न उठने के कारण सम्पर्क नहीं हो सका।

