तालिबानी विचारधारा पर प्रहार जरूरी

 तालिबानी विचारधारा पर प्रहार जरूरी

एजेंसी
तालिबानी विचारधारा पर प्रहार जरूरी

हृदय नारायण दीक्षित का आलेख (आतंक के आगे असहाय विश्व समुदाय) मन को काफी व्यथित करता है। अमेरिका मानवाधिकारों का हितैषी उसी सीमा तक है जहां तक उसके हित सधते हैं। तालिबान से उसका समझौता भेड़िये के शाकाहारी हो जाने की काल्पनिक सम्भावना पर आधारित है। पूरी दुनिया को पता है कि भेड़िये की मांद कहां है? लेकिन कोई बोलने को तैयार नहीं है। आतंकवाद को जड़ से खत्म करने के लिए तालिबानी विचारधारा पर प्रहार जरूरी है। जबतक इसे समूल नष्ट नहीं किया जाएगा तब तक 9/11 जैसे हमले होते रहेंगे। जो देश अमेरिका की अफगानिस्तान मामले में हो रही किरकिरी पर मौन हैं उनके लिए ये पंक्तियां प्रासंगिक हैं जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी इतिहास। आतंकवाद आज एक वैश्विक सच्चाइ है इसमें अच्छे और बुरे का भेद नहीं किया जा सकता। पूरा सभ्य समाज इसके निशाने पर है। इसलिए विश्व बिरादरी को इसके विरूद्व एकजुट होकर कठोर कदम उठाना होगा।

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