मिशन जीवन यात्रा: 100 दिन की पैदल यात्रा कर लौट रहे हैं कुशाग्र,पॉलिथीन के खिलाफ छेड़ी जागरूकता की मुहिम
बस्ती (यूपी)।
“भंवर से लड़ो तुम, लहरों से उलझो…” जैसी कहावत को चरितार्थ करते हुए बस्ती जनपद के कप्तानगंज क्षेत्र के परसपुरा गांव निवासी कुशाग्र उपाध्याय ने एक अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया है।
पर्यावरण संरक्षण और पॉलिथीन के दुष्प्रभाव के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से कुशाग्र ने 1 जनवरी 2026 को वाराणसी से गंगोत्री (उत्तराखंड) तक की पैदल यात्रा शुरू की थी, जो अब 100 दिन बाद 10 अप्रैल 2026 (शुक्रवार) को पूर्ण हो रही है।
इस लंबी और चुनौतीपूर्ण यात्रा के दौरान कुशाग्र ने गांवों, कस्बों, बाजारों और पहाड़ी क्षेत्रों में जाकर लोगों को पॉलिथीन के खतरनाक प्रभावों के बारे में जागरूक किया। उन्होंने बताया कि पॉलिथीन न केवल मिट्टी की उर्वरता को नष्ट कर रही है, बल्कि जीव-जंतुओं और मानव जीवन के लिए भी गंभीर खतरा बनती जा रही है।
यात्रा के दौरान उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा—दिनभर पैदल चलना, अनजान स्थानों पर रुकना और सीमित संसाधनों में अपनी दिनचर्या को संभालना।
इसके बावजूद उनका संकल्प अडिग रहा।
कुशाग्र की प्रारंभिक शिक्षा सरस्वती ज्ञान मंदिर बिहरा से तथा माध्यमिक शिक्षा औद्योगिक विकास इंटर कॉलेज बिहरा से हुई।
उन्होंने स्नातक की पढ़ाई अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या से पूरी की है। बचपन से ही सामाजिक कार्यों में रुचि रखने वाले कुशाग्र लगातार समाज में जागरूकता फैलाने का कार्य करते रहे हैं।
उनके पिता अशोक कुमार उपाध्याय ने बताया कि बेटे की इस यात्रा को लेकर परिवार चिंतित भी था, लेकिन उसके मजबूत इरादों और समाजसेवा की भावना को देखते हुए परिवार ने पूरा समर्थन दिया।
10 अप्रैल को दोपहर 1 बजे कप्तानगंज चौराहे पर कुशाग्र का भव्य स्वागत किया जाएगा।
परिवार और क्षेत्रवासियों ने लोगों से अपील की है कि अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर इस युवा का उत्साहवर्धन करें, ताकि समाज में एक सकारात्मक संदेश जाए।

