हिंदी दिवस पर गोष्ठी का आयोजन
वरिष्ठ पत्रकार व शिक्षाविद राजेंद्र उपाध्याय ने बताई हिंदी की महत्ता
यूपी,बस्ती। 14 सितम्बर "हिन्दी दिवस" के अवसर पर कप्तानगंज नकटीदेई स्थित माँ गायत्री इंटर कालेज में एक व्याख्यानमाला का आयोजन हुआ।
विद्यालय सभागार में बतौर मुख्य वक्ता पत्रकार एवं शिक्षाविद राजेन्द्र उपाध्याय ने स्वतंत्रता पूर्व एवं उसके बाद के आजादी काल मे हिंदी के समर्थकों एवं विरोधियों को पटल पर रखा।
उन्होंने कहा कि आजादी के पूर्व देश के कुछ तथाकथित राष्ट्रप्रेमी भी हिन्दी के बजाय उर्दू का पक्ष ले रहे थे। शिक्षाविद श्री उपाध्याय ने आज़ादी के बाद हिन्दी की दशा पर बोलते हुये कहा कि देश के तमिलनाडु एवं पंजाब प्रान्तों ने जिस तरह हिन्दी का विरोध किया था वैसी कल्पना भी नही जा सकती थी।
गोपाल स्वामी आयंगकर को धन्यवाद देते होते मुख्य वक्ता श्री उपाध्याय ने कहा कि दक्षिण भारतीय होते हुए भी उन्हों ने हिन्दी का भरपूर पक्ष लिया था।
14 सितम्बर 1949 को राजर्षि टण्डन एवं मालवीय जी का स्वप्न साकार हो उठा था और विरोधियों को मात देते हुए हिन्दी राष्ट्रीय भाषा से सम्पन्न हो गई ।
विद्यालय में बड़ी संख्या में मौजूद छात्र-छात्राओं के बीच कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधानाचार्य डॉ0 अरविंद कुमार मिश्र ने करते हुए कहा कि देश की राष्ट्रभाषा को अपनो ने ही तिरष्कृत करके अंग्रेजी भाषा को प्राथमिकता दी। खिचड़ी भाषा ने राष्ट्रभाषा के स्वरूप को धूमिल बनाने का प्रयास किया फिर भी कोई विरोधी हिन्दी के सामने टिक नही सका।
कार्यक्रम को विद्यालय के हिंदी प्रवक्ता अमित ने संबोधित किया और कहा कि हिन्दी को हम सभी प्रतिदिन अपने कार्य व्यवहार का विषय बनायेगे तभी राष्ट्र भाषा का सुनहला स्वरूप दिखेगा।
कार्यक्रम संचालन शिक्षाविद एवं पत्रकार बैजनाथ मिश्र ने किया और कहा कि हिन्दी अपने जन्मकाल से ही अजेय रही है।
समय समय पर हिंदी को संघर्षो से भी गुजरना पड़ा पर वह कभी हतोत्साहित नहीं हुई। अंततः 14 सितम्बर हिन्दी दिवस राष्ट्र को अपने हित मे स्वीकारना पड़ा।
इस मौके पर मनोज कुमार त्रिपाठी, हरिओम तिवारी, डॉ0 जितेन्द्र कुमार मौर्य, राम रतन, कु0 सीमा चौधरी, सविता दुबे, प्रेम चंद मिश्र, पत्रकार उमेश मिश्र, राजकुमार आदि मौजूद रहे।



