रामकथा श्रवण से मन निर्मल और चरित्र हो जाता है पावन : अंकित दास

 रामकथा श्रवण से मन निर्मल और चरित्र हो जाता है पावन : अंकित दास

गायघाट, बस्ती। कलियुग के प्राणी का मन -मलिन और चरित्र पतित होने पर मानव कर्तव्य और धर्म से बिचलित हो जाता है।और समाज में बिकृति फैल जाती है। ऐसे मे रामकथा के श्रवण से मन निर्मल और चरित्र पावन हो जाता है। राम कथा मनुष्य को आदर्श जीवन जीने के लिए प्रेरित करती है।

  यह सदबिचार अवध धाम से आये कथा वाचक अंकित दास जी महाराज ने श्री रुद्र महायज्ञ के दौरान दानवबीर बाबा कुटी बखड़ौरा मे चल रही सात दिवसीय संगीतमयी श्री रामकथा के पहले दिन ब्यास पीठ से ब्यक्त किया। उन्होंने रामकथा के महत्व को बिस्तार देते हुए कहा कि मानस के सरोवर मे गिरने से मनुष्य का जीवन धन्य हो जाता है। इसमे जाने का मुख्य साधन राम कथा ही है। जिस तरह भाषा की शुद्धि ब्याकरण से होती है उसी तरह जीवन की शुद्धि रामचरित्र मानस से होती है। राम कथा जीवन मे क्रांति लाकर शुद्ध मानव बनाती है। भगवान की कथा सुनने के लिए पृथ्वी पर नर, नारी, जीव जन्तु ही नही ईश्वर भी मनुष्य रूप मे अवतरित होते है।

          श्री रामकथा में मुख्य रूप से में यज्ञाचार्य/आयोजक विजय दास, मुख्य यजमान सन्तराम मिस्त्री, राम बचन चौधरी, राम रेखा, राम फेर प्रजापति, प्रकाश, रामकुमार राजभर, राम जीत, अंगूर चौधरी, दिलीप चौधरी, राम जनक राजभर सहित बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण मौजूद रहे।

चित्र परिचय - दानवबीर बाबा कुटी बखड़ौरा में श्रीराम कथा सुनाते अंकित दास जी महाराज

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