दो साल से कम उम्र बच्चों, गर्भवती और गंभीर बीमारी वाले लोगों को नहीं खिलानी है दवा
12 मई से संचालित फाइलेरिया रोधी एमडीए अभियान में आशा की भूमिका है अहम
बस्ती. देश से वर्ष 2025 तक फाइलेरिया के खात्मे के लिए 12 मई 2022 से मॉस ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) अभियान शुरू किया जा रहा है। 27 मई तक चलने वाले इस अभियान में आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को फाइलेरिया की दवा ‘डीईसी’ व पेट के कीड़े मारने की दवा ‘एल्बेंडाजोल’ अपनी मौजूदगी में खिलाएंगी। जिले में लगभग 28 लाख लोगों को दवा खिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह दवा दो साल से कम उम्र बच्चों, गर्भवती और गंभीर बीमारी वाले लोगों को नहीं खिलानी है
यह बातें यूआईपी सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता में एसीएमओ वेक्टर बार्न डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम (वीबीडीसी) डॉ. एफ हुसैन ने कहीं। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम की सफलता के लिए लोगों का इस बीमारी की गंभीरता व अभियान से होने वाले फायदे के संबंध में जागरूक होना जरूरी है। जन-जन तक ‘एमडीए’ कार्यक्रम से संबंधित बातें पहुंचाने में संचार माध्यमों व समाचार पत्रों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है। मीडिया के लोग इस अभियान को सफल बनाने में अपनी भूमिका का निर्वहन करें, जिससे देश से फाइलेरिया का खात्मा हो सके।
जिला मलेरिया अधिकारी आईए अंसारी ने कहा कि फाइलेरिया एक ऐसी बीमारी है जिसका न तो स्थायी इलाज है और न ही इससे किसी की मौत होती है, लेकिन बीमारी बढ़ने के साथ शारीरिक अपंगता बढ़ती जाती है। इसे ‘निग्लेक्टेड ट्रापिकल डिजीज’ की श्रेणी में शामिल किया गया है। दिव्यांगता बढ़ने के साथ व्यक्ति कामकाज में अक्षम हो जाता है। कमाऊ व्यक्ति के अपंग होने की दशा में परिवार पर इसका दुष्प्रभाव पड़ता है। देश की जीडीपी तक इससे प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि बीमारी से बचाव ही सबसे अच्छा रास्ता है। लगातार पांच साल तक साल में एक बार दवा के सेवन से व्यक्ति इस बीमारी से सुरक्षित रह सकता है। दवा खा चुके व्यक्ति में अगर फाइलेरिया के माइक्रो फाईलेरी होते हैं तो वह निष्क्रिय हो जाते हैं तथा उससे किसी अन्य के संक्रमित होने की आशंका नहीं रह जाती है।
अभियान में इन बातों का रखें विशेष ध्यान
- दो साल से कम उम्र के बच्चों को दवा न खिलाएं।
- किसी भी दशा में दवा खाली पेट न खाएं।
- गर्भवती महिला को दवा न खिलाएं।
- गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति को दवा न खिलाएं।
- दवा खाने के बाद किसी प्रकार की समस्या होने पर तत्काल नजदीकी अस्पताल या स्वास्थ्य कार्यकर्ता से संपर्क करें।
क्या है फाइलेरिया के लक्षण
फाइलेरिया एक विशेष प्रकार के क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होता है। सामान्य दिखने वाले संक्रमित व्यक्ति को काटने के बाद वहीं मच्छर अगर स्वस्थ व्यक्ति को काटता है तो स्वस्थ व्यक्ति के भी संक्रमित होने की आशंका रहती है। सामान्यत: इसे हाथी पांव के नाम से जाता है। इसमें शरीर के किसी भी अंग में पैर, हाथ, अंडकोष में सूजन आ जाती है, बाद में इसमें जख्म हो जाते हैं। किसी भी व्यक्ति के संक्रमित होने के बाद बीमारी होने में पांच से 15 साल तक लग सकते हैं। इससे बचाव के लिए एमडीए के दौरान दवा का सेवन करें, व सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग अवश्य करें। घर के आस-पास गंदा पानी जमा न होने दें।
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