बस्ती: हेल्थ सुपरवाइजर्स की एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित

 परिवार को बताएं टीके का महत्व और बीमारी की गम्भीरता

- टीकाकरण के प्रति उदासीन परिवारों को किया जाएगा जागरूक

- हेल्थ सुपरवाइजर्स की एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित

बस्ती। हेल्थ सुपरवाइजर्स की एक दिवसीय कार्यशाला एएनएम प्रशिक्षण केंद्र में गुरुवार को आयोजित हुई। इस अभिमुखीकरण कार्यशाला में नियमित टीकाकरण के प्रति उदासीन परिवारों को राजी करने के लिए स्वास्थ्य कर्मियों को जानकरी दी गई। जिले में लगभग 500 बच्चे ऐसे हैं, जिन्हें टीका नहीं लग सका है। स्पेशल नियमित टीकाकरण (आरआई) कार्यक्रम के दौरान ऐसे बच्चों को प्रतिरक्षित किया जाना है।  स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्पेशल आरआई कार्यक्रम संचालित किया जाएगा। 

डीआईओ डॉ. विनोद कुमार ने कहा कि जो भी परिवार नियमित टीकाकरण के प्रति उदासीन है, उन्हें बच्चों को होने वाली बीमारियों की गम्भीरता के बारे में बताने के साथ ही टीकाकरण के फायदे भी बताए जाएं। अगर स्वास्थ्य कार्यकर्ता के बताने के बाद भी परिवार टीकाकरण के लिए तैयार नहीं होता है तो ब्लॉक व जिले की टीम जाकर टीकाकरण कराए। 

डीएचईआईओ राजेश कुमार ने कहा कि एक भी टीका न लगवाने वाले बच्चों की संख्या काफी कम है। प्राय: यह देखा गया है कि एक या दो बार टीका लगवाने के बाद अगर बच्चे को बुखार की समस्या हो जाती है तो परिवार अगला टीका नहीं लगवाता है। ऐसे परिवार को बताया जाए कि कुछ टीके लगने के बाद बुखार आदि की समस्या स्वाभाविक है। इसके बाद भी अगर समस्या बढ़ती है तो निकटवर्ती सरकारी अस्पताल में जाकर बच्चे को दिखाया जा सकता है। 

यूनिसेफ के रीजनल कोआर्डिनेटर मनोज श्रीवास्तव व डीएमसी अनीता सिंह ने कहा कि टीका न लगवाने वाले परिवारों में अलग-अलग तरह की भ्रांतियां हैं । यह वह लोग हैं जो बच्चों को होने वाली बीमारियों के प्रति जागरूक नहीं है। ऐसे लोगों को बार-बार समझाने की जरूरत है। प्रवासी बच्चों के मामले में जब वह अपने घर मौजूद रहे, उसी दौरान उन्हें प्रतिरक्षित कराया जा सकता है। नगरीय स्वास्थ्य के जिला समन्वयक सचिन चौरसिया व अन्य मौजूद रहे।

पूर्व में किए गए प्रयास रहे हैं सफल

कार्यशाला में प्रतिभाग कर रहे साऊंघाट ब्लॉक के हेल्थ सुपरवाईजर एके मिश्रा ने बताया कि एक दो मामले ऐसे आते हैं, जिसमें परिवार की ओर से यह तर्क दिया जाता है कि टीका उनके यहां मान है, या अगर बच्चे को कुछ हो गया तो कौन जिम्मेदार होगा। पुरानी बस्ती के संजय कॉलोनी के एक परिवार के कई बच्चों को पूर्व में टीका नहीं लग सका था, लेकिन जब परिवार को कई बार समझाया गया व आस-पास के लोगों से इस कार्य में मदद ली गईतो अब परिवार टीकाकरण कराने लगा है। इस तरह के किए जा रहे प्रयासों की सीख कार्यशाला में मिलती है।  


 अभिभावक भी निभाएं जिम्मेदारी

- विशेष टीकाकरण सत्र की तिथि व स्थान की जानकारी नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र, एएनएम या क्षेत्र की आशा/आंगनबाड़ी कार्यकत्री से लें। 

- आपके दो साल तक के बच्चे का कोई टीका छूट गया है तो टीकाकरण सत्र पर ले जाकर उसे जरूर लगवाएं। 

- टीकाकरण सत्र पर साथ में बच्चे का टीकाकरण कार्ड मातृ एवं शिशु सुरक्षा कार्ड साथ लेकर जरूर जाएं। 

- अगर वैक्सीन से संबंधित आपको किसी तरह की शंका है तो क्षेत्र की आशा/एएनएम, या मेडिकल आफिसर से उनकी राय जरूर लें।

टीकाकरण के बाद इन बातों का रखे ख्याल

- टीकाकरण के पश्चात 30 मिनट तक टीकाकरण सत्र स्थल पर ही रुकें। 

- टीकाकरण कार्ड पर लगाए गए टीके को जरूर चढ़वाएं। 

- लगाया गया टीका किस बीमारी से बचाव से सम्बंधित है, उसके बारे में जानकारी एएनएम से लें।

- एएनएम से अगले टीकाकरण के सम्बंध में भी जानकारी लें। 

- टीका लगने के बाद अगर बुखार, दर्द या अन्य लक्षण दिखें तो तत्काल क्षेत्र की आशा कार्यकर्ता/एएनएम से संपर्क करें। आवश्यक हो तो अस्पताल में दिखाएं। 

- टीकाकरण कार्ड हमेंशा संभाल कर रखें, यह बच्चे के स्वास्थ्य सम्बंधी जानकारी के लिए जरूरी है। 

इन बीमारियों से होगा बचाव

पोलियो, काली खांसी, गला घोंटू, मिजिल्स, रूबेला, टीबी, डिप्थीरिया, निमोनिया, हेपेटाईिटस बी, जापानी इंसेफ्लाईिटस, पेचिश, टिटनेस। 


Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.