श्रीमद्भागवत कथा: सुदामा चरित्र को सुनकर भाव विभोर हुए श्रोता
नवदिवसीय संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन
यजमान के रूप में राम कुबेर उपाध्याय सपत्नी कथा श्रवण कर रहे हैं।
यूपी,बस्ती। जिले के कप्तानगंज ब्लॉक के परसपुरा गांव में नवदिवसीय संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ 15 नवंबर से एवं समापन 23 नवंबर दिन शनिवार को हवन पूजन के साथ होगा।
कथा के आठवें दिन अयोध्या धाम से पधारे आचार्य पंडित रवि शंकर शास्त्री जी ने कृष्ण सुदामा के मित्रता का वर्णन सुनाया।
आचार्य ने कहा सुदामा और कृष्ण बाल्य अवस्था के मित्र थे और कृष्ण के पास जब सुदामा अपनी पत्नी के आग्रह पर मिलने जाते तो उनसे द्वारपालों ने कहा ब्राह्मण श्रेष्ठ आपको द्वारिकापुरी में किससे मिलना है तो उन्होंने कहा कि मुझे कन्हैया से मिलना है तो द्वारपालों ने कहा हे ब्राह्मण श्रेष्ठ यहां कन्हैया कौन है तो सुदामा ने कहा जो इस नगर के राजा है उनसे मिलने आया हूं तो द्वारपालों ने कहा जो वस्तु चाहिए वह हम आपको उपलब्ध करा देते हैं आप वापस चले जाइए तो सुदामा ने कहा मुझे कन्हैया से मिलकर वापस जाना है।
मैं कुछ मांगने या किसी लालच में नहीं आया हूं पत्नी के कहने पर अपने बचपन के सखा से मिलने आया हूं। ये द्वारपाल आप जाकर बता दीजिए कि सुदामा आए हैं वह पहचान जाएंगे..
द्वारपाल ने जाकर कृष्ण को बताया कि एक अति गरीब ब्राह्मण बाहर खड़ा है आपसे मिलने की इच्छा जता रहा है और बता रहा है कि आपका मित्र है तो कृष्ण ने द्वारपाल से पूछा कि क्या नाम बताए तो द्वारपाल ने कहा कि वह अपना नाम सुदामा बता रहे है इतना सुनकर कृष्ण तेज गति से बाहर आए और सुदामा को देखकर उन्हें गले लगा लिया और सम्मान से महल में ले गए और उन्हें उस स्थान पर बैठाया जहां ब्रह्मा महेश को भी बैठने का अधिकार नहीं था। सर्वश्रेष्ठ स्थान देकर अपने मित्र का सम्मान करने वाले कृष्ण और सुदामा का चरित्र सुनकर उपस्थित श्रोता भाव विभोर हो गए।
कथा सम्पन्न होने पर आचार्य द्वारा आरती कराई गई और प्रसाद वितरण किया गया।
इस मौके पर इंद्र प्रताप नारायण,बृजेश उपाध्याय,शिवाकांत, रमाकांत,दिलीप उपाध्याय,श्रीकृष्ण, शीतला प्रसाद मिश्रा,अंगद कुमार,राम प्रसाद,हरिकरन,रोबिन उपाध्याय सहित अन्य श्रोता मौजूद रहे।

