नियमित दवा लेते रहें बीपी शुगर और टीबी के मरीज

 नियमित दवा लेते रहें बीपी शुगर और टीबी के मरीज

आनन्द धर द्विवेदी 

बस्ती। गलन को देखते हुए चिकित्सकों ने जनता को सतर्क किया है। डा. पी के पांडेय और चिकत्सा अधिकारी डॉक्टर बबिता पांडेय ने बीमारों, बुजुर्गो, बच्चों, नवजात शिशुओं, गर्भवती, ह्दय रोगी, सांस के रोगी, टीबी रोगी, मधुमेह रोगी और ब्लड प्रेशर रोगी जैसे उच्च जोखिम समूह का इस मौसम में विशेष ध्यान रखने को कहा है। उन्होंने बीपी, शुगर और टीबी के मरीजों को खानपान का विशेष ध्यान रखने और नियमित दवा सेवन करने के लिए कहा है।

डा. पी के पांडेय और डॉक्टर बबिता पांडेय ने बताया कि इस मौसम में सिंगल मोटा कपड़ा पहनने की बजाय कई स्तर का कपड़ा पहनना चाहिए, क्योंकि जो कपड़ों के बीच में हवा घुसती है तो वह एयर कंडीशनर का काम करती है। खानपान बिल्कुल संयमित रखना चाहिए। लोगों में भ्रांति है कि इस सीजन में कुछ भी खा लेंगे तो पच जाएगा, जबकि ऐसा नहीं है। असंतुलित खानपान से मधुमेह मरीजों में मधुमेह का स्तर और बढ़ जाता है। ज्यादा नमक के सेवन से ब्लड प्रेशर के मरीज का रक्तचाप और बढ़ जाता है। इस मौसम में ज्यादा खानपान से लोगों का पेट भी खराब हो जाता है। उन्होंने बताया कि ठंड में लोग अक्सर पानी पीना कम कर देते हैं, जबकि शरीर के सामान्य मेटाबोलिज्म के लिए दो से तीन लीटर पानी हर मौसम में पीना अनिवार्य है। लोग इस समय भी पर्याप्त गुनगुना पानी पीएं। शुगर और ब्लड प्रेशर के मरीज प्रत्येक 15 दिन पर अपने चिकित्सक से परामर्श लें

और नियमित जांच भी करवाते रहें। दवाओं का सेवन बंद नहीं होना चाहिए। गठियां के मरीजों को भी रक्त नलिकाएं सिकुड़ने की वजह से परेशानी हो सकती है। ऐसे मरीजों को भी आवश्यक दवा, सेंकाई और सही ढंग से कपड़े पहनना चाहिए। मौसम में शुष्कता के कारण चर्म रोग भी हो सकते हैं। इसलिए त्वचा का विशेष ध्यान रखें। ब्लड प्रेशर बढ़ने के कारण ह्दयघात और मस्तिष्कघात के मामले भी बढ़ जाते हैं। इसलिए एकाएक शरीर के तापमान में बदलाव से बचना चाहिए। छोटे बच्चों को लोग बहुत ज्यादा कपड़ा पहना देते हैं जिससे भीतर ही वह पसीने से तर हो जाते हैं। बच्चे कपड़े में ही मल मूत्र त्याग कर देर तक पड़े रहते हैं। बहुत सारे बच्चे ठंड में जमीन पर खेलते हैं। इन तीनों स्थितियों से बचाव करना होगा, क्योंकि यह बच्चों को बीमार बना सांस के मरीजों में उनकी सांस की नलियां सिकुड़ने के कारण दिक्कत हो सकती है। ऐसे लोगों की सांस फूलती है, खांसी आती है। खासतौर से जो लोग सिगरेट या बीड़ी पीते हैं उन्हें क्रानिक ब्रांकाइटिस व अस्थमा की दिक्कत हो जाती है। चिकित्सक डा. पी.पाडेय और डॉक्टर बबिता पांडेय ने बताया कि इस मौसम में वातावरण में प्रदूषण बढ़ जाता है। जो भी प्रदूषित कण होते हैं वह श्वसन तंत्र से हमारे शरीर के भीतर जाते हैं। ऐसे में जब तक धुंध और बदली रहे कोशिश करेंकि घर के बाहर न जाएं। बाहर निकलना हो तो शरीर को पूरा ढक कर निकलें।

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