बाढ़ से जनजीवन अस्त व्यस्त,कटान हुआ तेज परंतु अभी तक शासन प्रशासन की तरफ से कोई राहत नहीं रिपोर्ट- विनय त्रिपाठी अमृतपुर फर्रुखाबाद
गंगा नदी के जलस्तर में वृद्धि होने के साथ ही गंगा किनारे बसे गावों में कटान तेजी से शुरू हो गया है।नदी के किनारे बसे हुए लोगों का एक बार फिर जीना दूभर हो गया है।दिन रात उनकी आंखो के सामने ही उनके आशियाने उजड़ते जा रहे हैं और मायूस मन से लाचार होकर वह अपनी जिंदगी तबाह होते हुए देखने को मजबूर हैं।लोगों की वास्तविक स्थिति को जानने के लिए जब हम बाढ़ से पूर्णतया घिरे हुए हरसिंगपुर कायस्थ गांव में पहुंचे तो लोगों का दर्द और परेशानी देखकर दिल बहुत दुखी हुआ।उस समय यह एहसास हुआ कि हमारे देश में लोगों को इस तरह की परेशानियां भी झेलनी पड़ती है।एक तरफ सरकार लोगों की भलाई में अपना भरकस प्रयास कर रही है वहीं दूसरी तरफ जनप्रतिनिधियों व प्रशाशन द्वारा ऐसे ही लोगों की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जाता है।लाखों करोड़ों का बजट आने के बाद भी गावं में मौलिक सुविधाएं तक नहीं है।
जब जब चुनाव नजदीक आते हैं तो जनप्रतिनिधियों द्वारा बार बार बड़े बड़े वादे किए जाते हैं और चुनाव के बाद हर बार लोग खुद को ठगा हुए महसूस करते हैं।जब ग्राउंड रिपोर्ट लेने के लिए हम गांव पहुंचे तो वहां चारो ओर पानी ही पानी था। गावं से एक ग्रामीण को नाव लेकर बुलाया गया और तब हम नाव पर सवार होकर गावं पहुंचे।जब गावं पहुंचे तो ग्रामीण टकटकी लगाकर हमारी तरफ ही देख रहे थे ।जब उनसे बात की तो एक ग्रामीण बोला हम समझे आप राशन आदि के पैकेट लेकर हमारी मदद करने आए हैं।ग्रामीणों से पूछने पर पता चला कि अभी तक कोई भी सरकारी तंत्र का व्यक्ति गांव नहीं आया है।खाने पीने की बहुत ही समस्या है।राशन आदि की कमी है जो राशन सरकार द्वारा मिलता है वो भी दूसरे गांव में लेने जाना पड़ता है।पूरे गांव, जो अब टापू की तरह बसा हुआ है एक आध ही शौचालय नजर आए।जब लोगों से पूछा तो बताया पानी में घुसकर कहीं ऊंची जगह पर शौच के लिए जाना पड़ता है।लोग झोपड़ियों में रहने और खुले में शौच जाने के लिए मजबूर हैं।इसके अलावा जब लोगों से पूछा कि ऐसे हालत में जब किसी को इलाज की जरूरत होती है तो किस तरह से उसे इलाज की सुविधा, दवा आदि मिल पाती है तो ग्रामीणों ने बताया कि ऐसी हालत में इलाज के लिए कहां जाएं। हल्की फुल्की बीमारी ऐसे ही ठीक हो जाती है इसके अलावा अगर ज्यादा दिक्कत होगी तो नाव से ले जाएंगे।लोगों ने आरोप लगाया कि अभी तक स्वास्थय विभाग की टीम गावं में दवा वितरित करने आई है।कुछ ग्रामीणों ने बताया कि खाने के लिए सब्जी नहीं है सिर्फ नमक मिर्च से रोटी खाने को मजबूर हैं।जब लोगों से पूछा कि प्रशाशन कि तरफ से क्या मदद मिली?तो लोगों ने बताया कि जब कोई देखने ही न आता तो मदद कैसी।नाव तक नहीं दी गई।ये दो चार नाव की हम लोगों ने खुद से व्यवस्था की है।वहीं दूसरे छोर पर गावं का कुछ हिस्सा जो नदी की धार के बिल्कुल किनारे है वहां तेजी से कटान हो रहा है।दर्जनों मकान नदी के कटान की जद में आ चुके हैं।कई लोग खुद अपने ही हाथों से अपने घरों पर हथौड़ा चलने को मजबूर हैं। गावं का प्राथमिक विद्यालय भी नदी की धारा के बिल्कुल किनारे है और कटान की कगार पर है।जब इस संबंध में गांव के प्रधान से बात की तो प्रधान सुधीर राजपूत बताते हैं कि जब जब नदी में बाढ़ आती है तो ऐसा ही भयावह स्थिति हो जाती है।हर बार शासन प्रशासन को सूचित किया जाता है उसके बावजूद अभी तक कुछ नहीं हो सका है।हर साल कई मकान कट जाते है और लोग घर से बेघर हो जाते है।नाव के बारे में जब उनसे पूछा गया तो उन्होंने बताया कि तहसील में सूचना दी है परंतु अभी तक कोई नाव नहीं मिली है।जिन नाव की लोगो ने व्यवस्था की है उन्ही से काम चला रहे है।इस संबंध में जब तहसीलदार अमृतपुर संतोष कुशवाहा से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि लेखपाल को गावं की स्थिति जानने के लिए भेजा जाएगा।स्थिति की जानकारी करने के बाद प्रशासन की तरफ से हर संभव मदद की जाएगी। सीएमओ फर्रूखाबाद से जब लोगों के इलाज हेतु बातचीत की तो उन्होंने बताया कि मामले की जानकारी नहीं है।शीघ्र ही स्वास्थ्य विभाग की टीम को भेजकर लोगों के इलाज हेतु दवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी व हर संभव मदद की जाएगी।

