निरंकुशता:प्रधान सचिव और रोजगार सेवक बिना जॉब कर्ड नाबालिगों से करा रहे मजदूरी
ग्रामीण क्षेत्र में बेरोजगारों को सौ दिन का रोजगार दिए जानें को चलाई जा रही महत्वकांक्षी योजना मनरेगा में जमकर भ्रष्टाचार और बाल मजदूरी कराई जा रही है ।
सरकार ने बालश्रम को गैरकानूनी ठहराते हुए बालश्रम कानून लागू किया एवं इसे अपराध माना है व हर जिले क़े श्रम विभाग में बालश्रम विभाग की स्थापना भी कराई गई है ।
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| बाल मजदूरी कराते प्रधान और सचिव मनरेगा कार्य |
परन्तु सरकारी तंत्र में नियमावली को ताक पर रख नियम तोड़ने की पुरानी रवायत है ।
इसी को बरकरार रखते हुए वि 0ख़ 0उसाबा की ग्राम पंचायत दियोरिया असगुना में मनरेगा क़े तहत सड़क पर मिट्टी डालने का कार्य कराया जा रहा है ।
किसी क़े पास नही था जॉब कार्ड
मौक़े पर काम कर रहे मजदूरों से जॉब कार्ड की जानकारी ली गई किसी क़े पास जॉब नही था पूछने पर संतोष जनक जवाब नही दिया गया ।
गाँव की सरकार चला रहे प्रधान रोजगार सेवक और सचिव की कारगुजारी क़े चलते नाबालिग बच्चों से बालश्रम कराया गया ।मौक़े पर बालश्रम कर रहे मजदूरों क़े नाम राहुल पुत्र ऋषिपाल,प्रेमशंकर पुत्र महेंद्र,अनिल पुत्र खेमकरन,सूरज पुत्र नरेंद्र,विशाल पुत्र सुनील बताए जाते है ।
पूरे प्रकरण की जानकारी होनें क़े बावजूद रोजगार सेवक ने इसका ठीकरा विरोधियों पर फोड़ा और कहा की ये सब प्रधान क़े विरोधियों की करतूत है ।
मामले की जानकारी ग्राम प्रधान रबेंद्र वाल्मीकि से ली गई तो उन्होनें फ़ोन बच्चे को दे दिया और सवालों से बचते रहे ।
इस बारे में सचिव वीरसिंह से जानकारी ली गई तो फ़ोन बंद बताया गया ।
मनरेगा का काम देख रहे रोजगार सेवक दीपक से जानकारी ली गई तो उसने बताया की अभी नये नये प्रधान हुए है जानकारी नही है ।गाँब में तो ऐसा होता ही रहता है ।

