बस्ती:नगर पंचायत बनने के बाद भी पानी की निकासी नहीं
कप्तानगंज चौराहे के किनारे लगे पानी से परेशान कस्बे के व्यवसायी
बारिश होने के बाद सड़क से करीब 12 इंच ऊपर हो जाता है पानी
दुकानों पर ग्राहकों का पहुंचना होता है दुश्वार
जलजमाव के चलते बिक्री पर भी पड रहा असर
कप्तानगंज, बस्ती।राष्ट्रीय राजमार्ग 28 के कप्तानगंज चौराहे के दाएं और बाएं साइड दोनों तरफ बारिश के कारण जल जमाव की स्थिति हो गई है।
बता दें कि कुछ दिन पूर्व हाईवे की उत्तरी पटरी पर एनएचएआई के कर्मचारियों द्वारा सड़क चौड़ीकरण को लेकर साफ सफाई अभियान किया गया था। जिसमें सड़क पर बनी नाली के किनारे कुछ गहराई हो जाने के कारण जैसे ही बारिश होती है जल जमाव की स्थिति हो जाती है। ऐसे में दुकानदारों का निकलना दूभर हो गया है।स्थानीय दुकानदारों से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि पानी की इतनी जटिल समस्या है कि ग्राहकों का आना-जाना भी बंद हो गया है। 01 दिन बारिश होने के बाद करीब 1 हफ्ते तक पानी सूखता नहीं है एवं इसकी चौड़ाई इतनी ज्यादा है कि ग्राहक दुकान तक नहीं आ पाता है। ऐसे में बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इस संदर्भ में विभाग के सेक्शन इंजीनियर से बात की गई तो उन्होंने कहा कि सड़क चौड़ीकरण का कार्य होने ही वाला है जैसे ही कार्य का आरंभ होगा, सर्वप्रथम इसका लेवल मिलाकर पानी सड़क के किनारे बनी नाली में गिरा दिया जाएगा।
क्या राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण का इंतजार करने में क्या देर नहीं होगी। ऐसे ही दुकानदारों की समस्या बनी रहे, इस पर जिम्मेदारों की नजर क्यों नहीं जा रही है आखिर किसी न किसी तरह से इसका इंतजाम होना उचित है या नहीं। ऐसे कई सवालों का जवाब एनएचएआई के अधिकारियों के पास है जो देने से मुकरते हैं और इस जलजमाव की दुश्वारियां को दूर करने का कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। अधिकारियों से जब बात की जाती है तो महज कोरा आश्वासन मिलता है लेकिन इसका निवारण यह नहीं है। कार्यदाई संस्था को चाहिए कि कस्बे के प्रमुख चौराहे पर इस जलजमाव की स्थिति को संज्ञान में लेते हुए तत्काल प्रभाव से कोई उचित रास्ता निकालें।
ऐसे ही कप्तानगंज अंडरपास के उत्तरी तरफ हल्की सी बारिश हो जाने पर बारिश का पानी सर्विस रोड में भर जाता है। उसके बगल में ही बनी नालियों में पानी जाने का कोई रास्ता नहीं और नाली के कुछ कट ऐसे हैं जहां से जल का रिसाव होकर बाहर सड़कों पर आ जाता है। इसकी भी शिकायत स्थानीय लोगों ने संबंधित महकमे को की लेकिन उसका भी कोई निवारण नहीं हो सका।