( ज्ञान चंद्र द्विवेदी)
बस्ती । हलषष्ठी का पर्व बस्ती जनपद सहित पूरे पूर्वांचल में बड़े ही श्रद्धा उल्लास के साथ भक्तमय वातावरण में मनाया गया। महिलाएं व्रत पालन के पूर्व नए वस्त्र धारण कर पूजा स्थल में उपस्थित हुई जहाँ श्रद्धा मुताबिक पूजा अर्चना किया गया।
कहा जाता है कि हल षष्ठी पर्व भाद्रपद कृष्ण षष्ठी को यह व्रत भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलरामजी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन श्री बलरामजी का जन्म हुआ था। वही पूरे देश में आज महिलाएं पुत्रों के दीर्घायु के लिए यह व्रत रखती है।
इसके साथ ही इस व्रत में गाय के दूध व दही का सेवन करना मना है। इस दिन बिना हल चले धरती का अन्न व शाक भाजी खाना चाहिए साथ ही इस व्रत में दिनभर निर्जला व्रत रखने के बाद शाम को तिन्नी के चावल और महुए का पारण करने की भी मान्यता है।
इसके साथ ही इस व्रत में गाय के दूध व दही का सेवन करना मना है। इस दिन बिना हल चले धरती का अन्न व शाक भाजी खाना चाहिए साथ ही इस व्रत में दिनभर निर्जला व्रत रखने के बाद शाम को तिन्नी के चावल और महुए का पारण करने की भी मान्यता है।



