श्रीराम कथा का आयोजन,भरत की कथा सुन भाव विभोर हुए श्रोता
नगर बाज़ार
विस्व भरन पोषन कर जोई। ताकर नाम भरत अस होई।।
श्रीरामकथा के सप्तम दिवस उज्जैन महाकाल से पधारे स्वामी प्रणव पुरी जी महाराज ने श्रीभरत चरित पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज भी आप चाहते हैं कि रामराज्य आये तो उसके लिए भरत जी का भाव लाना पडेगा ।
श्रीभरत जी ने कभी भी राज सिंहासन का मोह नही किया ,अपितु मिलते हुए सिंहासन को भी ठुकरा दिया।
श्रीभरत ने श्रीराम राज्य की स्थापना चौदह वर्ष पहले ही कर दी थी ।
आचार्य ने कहा कि हमारे आपके मन में भी ऐसे त्याग एवं समर्पण की भावना नही होगी,तब तक राम राज्य की स्थापना नहीं हो सकती ।
आज हर व्यक्ति एक दूसरे को गिरा कर स्वयं आगे बढने के प्रयास में लगा है,स्वार्थ और महत्वाकांक्षा से इतना ग्रसित हो गया है कि अपना घर परिवार कैसे धन से भर ले, इसी में दिन रात लगा रहता है,फिर कैसे राम राज्य आएगा क्योंकि रामराज्य के लिए तो भरत जी का चरित्र अपनाना पडेगा।
जो दूसरों का भरण पोषण करने की चिंता करे न कि स्वयं की
इस अवसर, समस्त श्रोताओं का यजमान राधेश्याम चौघरी, घनश्याम चौधरी, प्रधान शिव श्याम चौधरी, कृष्णा चौधरी ने आभार व्यक्त किया। उपस्थित श्रोता श्रीराम कथा में भरत के चरित्र चित्रण को सुनकर भाव विभोर हो गए। पूरा पांडाल प्रभु श्रीराम व भरत जी के जय जयकार के जयघोष से गुंजायमान हो गया।
