अंतरा इंजेक्शन के प्रति बढ़ा भरोसा तो बढ़ गए लाभार्थी, गर्भनिरोधन में कारगर है त्रैमासिक अंतरा इंजेक्शन

 अंतरा इंजेक्शन के प्रति बढ़ा भरोसा तो बढ़ गए लाभार्थी

- गर्भनिरोधन में कारगर है त्रैमासिक अंतरा इंजेक्शन

बस्ती। त्रैमासिक गर्भनिरोधक साधन अंतरा इंजेक्शन एक कारगर विधि है। इसे अपनाने वाली महिलाओं की संख्या भी जिले में बढ़ने लगी है। परिवार नियोजन के बॉस्केट ऑफ च्वाइस का परामर्श पाने के बाद महिलाएं इसे अपनाने के लिए आगे आ रही हैं । परामर्श के दौरान महिलाओं को इसके बारे में विस्तार से जानकारी दी जाती है और उनके मन में बैठी भ्रांतियों को भी दूर किया जाता है । उन्हें बताया जाता है कि एक बार इंजेक्शन लगवा कर तीन माह तक अनचाहे गर्भ से मुक्त रहा जा सकता है।

अर्बन पीएचसी बरदहिया की प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. मासूमा जमील का कहना है कि कई महिलाएं गर्भवती होने होने पर अनचाहे गर्भ से छुटकारा पाने के लिए कई प्रकार की दवाओं का इस्तेमाल करती है, जिनसे ब्लीडिंग की भी दिक्कत हो जाती है। ऐसी स्थिति में कमजोरी व इंफेक्शन का भी खतरा रहता है। इस स्थिति को रोकने के लिए दंपति को परिवार नियोजन के बॉस्केट ऑफ च्वाइस के बारे में प्रोत्साहित किया जा रहा है।  

 परामर्श के दौरान जिन महिलाओं को अंतरा पसंद आता है पहले उनकी चिकित्सकीय जांच कराई जाती है। उन्हें पात्र पाए जाने पर उनकी स्वीकृति के बाद उन्हें प्रशिक्षित स्टॉफ नर्स से अंतरा इंजेक्शन लगवाया जाता है। 

स्टॉफ नर्स पूनम यादव ने बताया कि चिकित्सक के परामर्श पर ही अंतरा इंजेक्शन लगाया जाता है। महिला को बता दिया जाता है इंजेक्शन लगवाने के बाद कई बार हार्मोनल बदलाव आते हैं। ऐसी दशा में घबराना नहीं है। अगर कोई विशेष दिक्कत है तो अस्पताल में सम्पर्क करना चाहिए।

इंजेक्शन की जगह पर सिंकाई न करे। लाभार्थी को ऑयरन व कैल्शियम की गोली भी दी जाती है। उन्हें बताया जाता है कि अगर माहवारी सम्बन्धित कोई बदलाव हो तो इससे भी घबराना नहीं है। यह अंतरा इंजेक्शन के कारण होने वाला हार्मोनल बदलाव है। 

पिछले साल की तुलना में बढ गए लाभार्थी

डीपीएम एनएचएम राकेश पांडेय का कहना है कि पिछले साल की तुलना में अंतरा इंजेक्शन के लाभार्थियों की संख्या बढ़ी है। पिछले साल जहां कुल 4660 इंजेक्शन लगाया गया था वहीं इस साल अब तक कुल 5510 इंजेक्शन लगाया जा चुका है। ग्रामीण स्तर तक की स्वास्थ्य इकाइयों पर इंजेक्शन व प्रशिक्षित स्टॉफ की उपलब्धता भी इसकी वजह है। 


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