शिव महापुराण कथा में चौथे दिन शिव-पार्वती विवाह का प्रसंग सुन मंत्र मुग्ध हुए श्रोता

शिव महापुराण कथा में चौथे दिन  शिव-पार्वती विवाह का प्रसंग सुन मंत्र मुग्ध हुए श्रोता


(आनन्दधर द्विवेदी)
दुबौलिया। देवखर गांव में चल रहे संगीतमयी शिव महापुराण कथा के चौथे दिन कथा व्यास रविंद्र शास्त्री महाराज ने शिव पार्वती विवाह का प्रसंग सुनाया। इस दौरान कथा पांडाल में उपस्थित भक्तजन झूम उठे। शिव-पार्वती विवाह प्रसंग में कथा व्यास ने बताया कि जब शिव और पार्वती का विवाह होने वाला था तो एक बड़ी सुंदर घटना हुई, उन्होंने कहा कि भोलेनाथ की शादी बहुत ही भव्य एवं विचित्र थी। इससे पहले ऐसी शादी कभी नहीं हुई थी। शिव दुनिया के सबसे तेजस्वी देव थे। शिव एवं पार्वती एक दूसरे को अपने जीवन का हिस्सा बनाने वाले थे। सभी देवता तो वहां मौजूद थे ही, साथ ही असुर भूत प्रेत पिशाच भी बाराती बनकर पहुंचे थे।


उन्होंने बताया कि जहां देवता जाते थे, वहां असुर जाने से मना कर देते थे। जहां असुर जाते थे, वहां देवता नहीं जाते थे। शिव पशुपति हैं, मतलब सभी जीवों के देवता भी हैं। इसलिए सारे जानवर, कीड़े-मकोड़े और सारे जीव जंतु महादेव के विवाह में उपस्थित हुए। यहां तक कि भूत-पिशाच और विक्षिप्त लोग भी उनके विवाह में मेहमान बन कर पहुंचे। उनकी आपस में बिल्कुल नहीं बनती थी। मगर यह तो शिव का विवाह था, इसलिए उन्होंने अपने सारे झगड़े भुलाकर एक बार एक साथ आने का मन बनाया।

 इस अवसर पर मुख्य यजमान पंडित अवधेश प्रसाद पांडे,आयोजन कर्ता  महंत शैलेंद्र दास जी महाराज,हरेंद्र मिश्रा,रितेश पाण्डेय,पूजा पाण्डेय,विजय प्रकाश पाण्डेय, प्रधान प्रतिनिधि राम सागर वर्मा सहित तमाम लोग मौजूद रहे।

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