दोनों देशों के मध्य महत्वपूर्ण समझौते संपन्न

 भारत - वियतनाम


दोनों देशों के मध्य महत्वपूर्ण समझौते संपन्न

मार्च 2018 में भारत और वियतनाम ने एक सक्षम और नियम आधारित क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था का आह्वान करते हुए भारत प्रशांत क्षेत्र को खुला रखने का संकल्प जताया एवं परमाणु सहयोग बढ़ाने के लिए भी समझौता किया। भारत- प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती सामर्थ्य की वजह से इस समझौते को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वियतनाम के राष्ट्रपति जान दाई क्वांग के बीच व्यापक बातचीत के बाद दोनों रणनीतिक भागीदारों ने समुद्री क्षेत्र, रक्षा, साइबर सुरक्षा, तेल व प्राकृतिक गैस, व्यापार और कृषि सहित कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने को लेकर समझौतों पर हस्ताक्षर किए।

वियतनाम के राष्ट्रपति की उपस्थिति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मीडिया को दिए एक बयान में कहा, हम मिलकर एक खुले, स्वतंत्र और प्रगति बाले भारत-प्रशांत क्षेत्र के लिए कार्य करेंगे। उसमें संप्रभुता और अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का सम्मान होगा और वहां मतभेदों को बातचीत के माध्यम से सुलझाया जाएगा। उन्होंने कहा, दोनों पक्षों ने एक खुली, सक्षम और नियम आधारित क्षेत्रीय व्यवस्था के लिए प्रतिबद्धता जताई है। साथ ही समुद्री क्षेत्र में सहयोग आगे बढ़ाने पर जोर दिया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों पक्षों ने रक्षा उत्पादन में सहयोग करने और तकनीक हस्तांतरण के क्षेत्र में अवसर तलाशने का निर्णय किया है। भारत और वियतनाम तेल और गैस खोज, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और कपड़ा जैसे क्षेत्रों में व्यापार और निवेश संबंधों को और गहरा करने पर सहमत हुए हैं।

वियतनाम ने दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के संगठन 'आसियान' के साथ भारत के बहुआयामी संपर्क का समर्थन किया। वियतनाम के राष्ट्रपति त्रान दाई क्वांग ने दक्षिण चीन सागर को लेकर जारी विवाद को स्पष्ट करते हुए कहा कि हम आसियान देशों के साथ भारत के बहुआयामी संपर्क का समर्थन करते हैं। हम इस पर बल देते हैं कि क्षेत्र में नौवहन और आकाश में उडान की स्वतंत्रता होनी चाहिए। साथ ही किसी भी विवाद का हल शांतिपूर्ण तरीके से किया जाना चाहिए। विदित है कि दक्षिण चीन सागर को लेकर वियतनाम और कई अन्य आसियान सदस्य देशों का चीन से विवाद चल रहा है।

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