थाने पर दो दिवसीय योग शिविर का आयोजन
यूपी, बस्ती। जिले के कप्तानगंज थाने पर थानाध्यक्ष बृजेश सिंह के नेतृत्व में योग शिविर का आयोजन किया गया।
योग शिविर में प्रशिक्षक गरूणध्वज पाण्डेय द्वारा प्राणायाम तथा आदित्य नारायण गिरि द्वारा आसन, सूर्य नमस्कार, भूमि नमस्कार तथा ध्यान मुद्रा का अभ्यास कराया गया।
योगाभ्यास करते हुए योगाचार्य आदित्य नारायण गिरि ने कहा कि
योगस्थ: कुरुकर्माणि संगं त्यक्त्वा धनंजय ।
सिद्धय सिद्धयो:समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते!।
अर्थात हमारे व्यवहारिक जीवन में योग का क्या साधन है अथवा व्यवहारिक जीवन में योग को कैसे जोड़ें ?
इसका श्रेष्ठ उत्तर केवल गीता के इन सूत्रों के अलावा कहीं और नहीं मिल सकता है।
गुफा और कन्दराओं में बैठकर की जाने वाली साधना ही योग नहीं है। हम अपने जीवन में, अपने कर्मों को कितनी श्रेष्ठता के साथ करते हैं, कितनी स्वच्छता के साथ करते हैं बस यही तो योग है। गीता जी तो कहती हैं कि किसी वस्तु की प्राप्ति पर आपको अभिमान ना हो और किसी के छूट जाने पर दुःख भी न हो।
सफलता मिले तो भी नजर जमीन पर रहे और असफलता मिले तो पैरों के नीचे से जमीन काँपने न लग जाये। बस दोंनो परिस्थितियों में एक सा भाव ही तो योग है। यह समभाव ही तो योग है।
थानाध्यक्ष वृजेश सिंह ने सम्बोधित करते हुए कहा कि
योग वह विधा है जो शरीर, आत्मा और मन तीनो का संतुलन बना करके स्वास्थ्य को उत्तम बनाने का कार्य करता है।
योग प्रशिक्षक आदित्य नारायण गिरि ने कहा
योग चित्त विक्षेप को समाप्त कर अपने निज आत्म स्वरूप को देखने समझने परखने तथा 'स्व ' का साक्षात्कार करने मे सक्षम बनाता है ।
वर्तमान परिदृश्य में योग जीवन का अभिन्न अंग बन गया है। योग से शारीरिक, मानसिक लाभ के साथ साथ अध्यात्मिक लाभ मे विजय प्राप्त किया जा सकता है।



