बस्ती: सेहत के लिए जले तेल का इस्तेमाल रोकने की पहल

 सेहत के लिए जले तेल का इस्तेमाल रोकने की पहल

12 उद्यमियों ने लखनऊ की फर्म से किया करार

जले तेल से बनाया जाएगा ईंधन

खाद्य सुरक्षा विभाग की पहल पर उठाया गया कदम

बस्ती। जले हुए खाद्य तेल का इस्तेमाल अब ईधन बनाने में होगा। ऐसा तेल स्वास्थ्य के लिए हितकर नहीं है, इसलिए यह कदम उठाया गया है । पिछले दिनों जिले के प्रमुख होटल व नमकीन बनाने वाली फर्मों के व्यवसायियों के साथ हुई बैठक में लखनऊ की एक फर्म ने करार किया है। सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा डॉ. शशि पांडेय की अध्यक्षता में मंडलायुक्त कार्यालय में व्यवसायियों व फर्म के साथ हुई बैठक में करार हुआ है। 12 व्यवसायियों ने करार पर हस्ताक्षर किया है।

खाद्य सुरक्षा विभाग का कहना है कि स्वास्थ्य की दृष्टि से यह बड़ा कदम है। जले हुए खाद्य तेल के इस्तेमाल से दिल की बीमारियेां का खतरा बढ़ जाता है। केंद्र सरकार ने इसके इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा रखा है।

खाद्य सुरक्षा विभाग के अभिहित अधिकारी अपूर्वा श्रीवास्तव ने बताया कि केंद्र सरकार की ओर से जले हुए खाद्य तेल के दोबारा इस्तेमाल पर पाबंदी लगाई गई है। इसका पालन जिले में भी कराना है। इसे देखते हुए यह व्यवस्था की गई है कि व्यवसायी जले हुए तेल का इस्तेमाल करने के बजाए सीधे फर्म को बेच दें। इसके लिए सात होटल व पांच नमकीन निर्माताओं से करार किया गया है। फर्म इससे बॉयोडीजल बनाने का काम करेगी। जिले में यह फर्म डोर-टू-डोर जले तेल को कलेक्ट करेगी। पहले चरण में प्रति माह 400 लीटर फर्म को मिलेगा। उन्होंने बताया कि कोई भी छोटा व बड़ा व्यवसायी जले हुए तेल का इस्तेमाल नहीं कर सकता है तथा इसे पंजीकृत फर्म को ही बेच सकता है।

तीन बार तक गर्माया जा सकता है तेल

अपूर्वा श्रीवास्तव ने बताया कि अधिकतम तीन बार एक खाद्य तेल को गरमाया जाता है। इसके बाद इसकी टीपीसी (टोटल पोलर कंटेंट) 25 से ऊपर हो जाता है। सामान्य तेल में यह पांच तक होता है। इसकी जांच मशीन द्वारा की जाती है। टीपीसी बढ़ने के बाद इसका इस्तेमाल मानव शरीर के लिए हानिकारक हो जाता है।


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