बस्ती: छुट्टा पशुओं के आतंक से राहगीर व दुकानदार परेशान, जिम्मेदार मौन

छुट्टा पशुओं के आतंक से राहगीर व दुकानदार परेशान, जिम्मेदार मौन

(ज्ञानचंद्र द्विवेदी)

कलवारी। कलवारी थाना क्षेत्र के ऐतिहासिक राम जानकी मार्ग पर छुट्टा पशुओं की भरमार है राष्ट्रीय राजमार्गों से लेकर ग्रामीण क्षेत्र के सड़को पर भी छुट्टा जानवर घूम रहे हैं जो राहगीरो की जान के दुश्मन बने हुए हैं। यह जानवर किसानों की फसलें हो रोड हो या चौराहा कहीं पर भी स्वतंत्र घूमते और लड़ते हुए नजर आते हैं। कलवारी थाना क्षेत्र के बेइली, कुशौरा, कलवारी, चमनगंज, चौराहे व ऐतिहासिक रामजानकी मार्ग के दुबौलिया बाजार, सैनिया चैराहा, चिलमा, गौसपुर अगौना चकदहा, पाऊ, गायघाट, ब्लाक मुख्यालय कुदरहा आदि जगहों पर छुट्टा पशुओं का आतंक बहुत बढ़ गया है जिससे राहगीरों को आने जाने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता हैं कस्बे में भी लोग इन छुट्टा जानवरों के आतंक से परेशान हैं। इस कस्बे का मुख्य चौराहा हो या अन्य गलियां हर जगह छुट्टा जानवर घूमते नजर आते हैं।

छुट्टा पशुओं के आतंक से राहगीर व दुकानदार परेशान, जिम्मेदार मौन

 यहां मुख्य चौराहे पर छुट्टा जानवर झुण्ड बनाकर बैठते हैं और आपस में घंटो लड़ते रहते हैं। जानवरों की आपस में लड़ने से आने जाने वाले राहगीरों को काफी समस्याएं होती है। वहीं दुकानदार भी इन जानवरों के आतंक से परेशान है। दुकानदारों को इन जानवरों से परेशान होकर कभी-कभी अपनी दुकानें भी बंद करनी पड़ती है। बताया जा रहा है कि पास में गौशाला होने के बावजूद भी इन छुट्टा जानवरों को वहां नहीं रखा जाता, जिससे लोगों की समस्या का कारण बने हुए हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सभी राजनीतिक दल विभिन्न मुद्दों के साथ मैदान में थे। जिसमें विकास के साथ छुट्टा पशुओं की समस्या भी राजनीतिक दलों का प्रमुख मुद्दा बना था। जिसमें छुट्टा जानवरों से किसानों को होने वाले नुकसान। उनके हमले से लोंगो की मौत को लेकर पक्ष-विपक्ष के बीच जुबानी जंग भी हुई थी। छुट्टा जानवरों को लेकर सरकार चाहे जितनी भी गंभीर हो, लेकिन बस्ती जिले के जिम्मेदार अधिकारी छुट्टा जानवरों को लेकर गंभीर नहीं दिख रहे हैं। छुट्टा जानवरों के आतंक से राहगीरों के साथ स्थानीय दुकानदारों को काफी समस्याएं हो रही है। जहां राहगीर जानवरों के लड़ने और झगड़ने के चलते आगे नहीं जा पाते। वहीं दुकानदारों को जानवरों के लड़ने से होने वाले नुकसान के चलते कभी-कभी अपनी दुकानें भी बंद करनी पड़ती है। लोगो इन जानवरों से निजात पाने को लेकर अधिकारियों से आस लगाए बैठे हैं।

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