भागवत कथा से होता है मन का शुद्धिकरण

 भागवत कथा से होता है मन का शुद्धिकरण 

(आनंद धर द्विवेदी)

दुबौलिया। दुबौलिया ब्लाक क्षेत्र के खलवा गांव में स्थित शिव मंदिर परिसर में आयोजित नौ दिवसीय संगीतमयी श्रीमद् भागवत कथा के चतुर्थ दिवस अयोध्या धाम से पधारे आचार्य दीपक शुक्ला बंटी ने श्रीमद् भागवत महापुराण की कथा सुनाते हुए महाराज ने कहा कि कथा की सार्थकता तब ही सिद्ध होती है जब इसे हम अपने जीवन व व्यवहार में धारण कर निरंतर हरिस्मरण करते हैं। अपने जीवन को आनंदमय, मंगलमय बनाकर अपना आत्म कल्याण करें। अन्यथा यह कथा केवल आपके कानों के रस तक ही सीमित रह जाएगी। भागवत कथा से मन का शुद्धिकरण होता है। इससे संशय दूर होता है और शांति व मुक्ति मिलती है। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा श्रवण से जन्म जन्मांतर के विकार नष्ट हो जाते हैं। जहां अन्य युगों में धर्म लाभ एवं मोक्ष प्राप्ति के लिए अनेक प्रयास करने पड़ते हैं, कलियुग में कथा सुनने मात्र से व्यक्ति भवसागर से पार हो जाता है। सोया हुआ ज्ञान वैराग्य कथा श्रवण से जाग्रत हो जाता है।  


उन्होंने बताया कि भागवत पुराण हिन्दुओं के अठारह पुराणों में से एक है। इसे श्रीमद् भागवत या केवल भागवतम् भी कहते हैं। इसका मुख्य विषय भक्ति योग है, जिसमें श्रीकृष्ण को सभी देवों का देव या स्वयं भगवान के रूप में चित्रित किया गया है। इस पुराण में रस भाव की भक्ति का निरूपण भी किया गया है। भगवान की विभिन्न कथाओं का सार श्रीमद् भागवत मोक्ष दायिनी है। इसके श्रवण से परीक्षित को मोक्ष की प्राप्ति हुई और कलियुग में आज भी इसका प्रत्यक्ष प्रमाण देखने को मिलते हैं। कथा के दौरान काफी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। शनिवार की कथा में भगवान बिष्णु के वराह अवतार प्रसंद का किया।इस दौरान मुख्य यजमान चंद्रशेखर और  सावित्री द्विवेदी के साथ  राजेन्द्र राजभर, भगवान बक्श सिंह, अमन प्रताप सिंह,बुद्धि सागर तिवारी, अम्बिका सिंह, रामपाल राजभर, मो. मोबीन,शशिधर दूबे आदि मौजूद रहे।


Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.