चार साल के असफाक ने रखा पहला रोज़ा

 चार साल के असफाक ने रखा पहला रोज़ा


यूपी,कप्तानगंज/बस्ती।  रमजान के महीने में छोटे बच्चे रोजा नहीं रखा करते। इस्लाम के मुताबिक सात साल से कम उम्र के बच्चे रोजा नहीं रखते, लेकिन चार साल के नूर मोहम्मद के बेटे असफाक  ने इस रमजान का पहला रोजा रखा।



रमजान के इस पाक महीने की ओर अपने माता-पिता का रुझान, जोश और आस्था देखते हुए कप्तानगंज निवासी नूर मोहम्मद के बेटे असफाक ने रोजा रखने की इच्छा जताई और रखा। नूर मोहम्मद ने कहा कि वह पूरे महीने रोजे रखना चाहता है। इतना ही नहीं, इस्लाम के सख्त नियमों को मानते हुए उसने 'अरबी की तिलावत' भी पढ़ना शुरू कर दिया है। इस्लाम में 5 साल के बच्चो को रोजे रखने की इजाजत नहीं देता, लेकिन बच्चे ने अपनी जिद और आस्था के चलते रोजा रखा। जब हमने उसे रोकना चाहा और कहा कि इस बार यह बेहद मुश्किल है क्योंकि रमजान गर्मियों में पड़ा है तो उसने जिद की जिससे उसे पहला रोजा रखवाया गया। असफाक पहले रोजे के दिन घंटों तक बगैर पानी के रहा। शाम 6ः14 बजे तक इफ्तार तक उसने कुछ नहीं खाया। पहले रोजे के लिए असफाक को ईदी के रूप में कैश, नए कपड़े और खिलौने मिले। आगे वह रोजे रखेगा या नहीं, यह पूछे जाने पर उसके माता-पिता ने कहा कि उसके लिए यह बेहद मुश्किल है लेकिन रोजा रखना चाहता है। असफाक के पहले रोजे को लेकर उनके परिजन खुश हैं।

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