गर्भवती, धात्री, नवजात और बच्चों के सुपोषण के लिए चल रहे हैं अभियान

 गर्भवती, धात्री, नवजात और बच्चों के सुपोषण के लिए चल रहे हैं अभियान

एक कदम सुपोषण की ओर और संभव अभियान के जरिये सुपोषण की पहल

आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की मदद से ले सकते हैं अभियान का लाभ

गोरखपुर। जिले में जून माह में एक कदम सुपोषण की ओर का पहला और संभव अभियान का तीसरा चरण चलाया जा रहा है, जिसका लाभ आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की मदद से ले सकते हैं । अभियान का उद्देश्य गर्भवती, धात्री, नवजात शिशु और बच्चों को सुपोषित बनाना है । गर्भावस्था से ही पोषण की नींव डालने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग और आईसीडीएस विभाग एक साथ मिल कर लक्षित समुदाय को सेवाओं से जोड़ने और व्यवहार परिवर्तन में जुटे हुए हैं ।


जिला कार्यक्रम अधिकारी हेमंत सिंह ने बताया कि मई तक 7174 अति कुपोषित बच्चे जिले में चिन्हित किये गये थे। जून में शुरू हुए एक कदम सुपोषण की ओर अभियान के तहत 627 से अधिक बच्चों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ा जा चुका है। इन बच्चों को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सुपोषण की खुराक दी गई है। साथ ही विभाग की तरफ से खानपान संबंधी सलाह भी दी गयी। अभिभावकों को यह संदेश दिया जा रहा है कि छह माह तक बच्चे को सिर्फ स्तनपान करवाना है। छह माह से दो वर्ष की उम्र तक स्तनपान के साथ साथ पूरक आहार भी देना है। पूरक आहार में घरेलू आहार जैसे अनाज, दाल, दलिया, फल आदि ही देना है। विभाग की ओर से कुपोषित बच्चों को दो किलो चने की दाल, दो किलो दलिया और आधा किलो रिफाइन देने का प्रावधान है।

श्री सिंह ने बताया कि संभव अभियान के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों में पंजीकृत 58.52 फीसदी से अधिक बच्चों के पोषण स्तर का आंकलन कर पोषण ट्रैकर एप पर पंजीकृत किया जा चुका है । सभी बच्चों की एंट्री के बाद जिले में जो नये कुपोषित बच्चे मिलेंगे उन्हें भी स्वास्थ्य और पोषण सेवाओं से जोड़ा जाएगा । जिले में पोषण ट्रैकर एप पर पंजीकृत 21642 धात्री और 37390 गर्भवती हैं जिन्हें पोषाहार दिया जा रहा है । आधार कार्ड के साथ नये लाभार्थी भी आंगनबाड़ी केंद्र के माध्यम से सेवाओं से जुड़ सकते हैं और लाभ उठा सकते हैं । इस अभियान में यूनिसेफ संस्था के पोषण विशेषज्ञ सुरेश तिवारी विशेष सहयोग प्रदान कर रहे हैं ।


*दिशा निर्देशों के अनुसार चल रहा अभियान* 


जिला कार्यक्रम अधिकारी ने बताया कि बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग की निदेशक और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक द्वारा जारी संयुक्त पत्र में एक कदम सुपोषण की ओर और संभव अभियान के बारे में विस्तृत दिशा निर्देश दिये गये हैं । इन निर्देशों के अनुसार एक कदम सुपोषण की ओर अभियान में प्रत्येक गर्भवती व धात्री तक आयरन, कैल्शियम, एल्बेंडाजोल और फोलिक एसिड की दवाएं पहुंचाई जानी हैं और उनका सेवन सुनिश्चित कराना है । स्वास्थ्य विभाग से मिलने वाली इस सेवा तक पहुंचाने में आशा कार्यकर्ता के साथ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भी मदद करेंगी । इस अभियान के तहत अति कुपोषित (सैम) बच्चों को सीआईवीएचएसएनडी सत्र पर ले जाकर एएनएम और सीएचओ द्वारा छह प्रकार की दवाएं दिलवाई जाएंगी और इसकी रिपोर्टिंग ई कवच पोर्टल पर की जाएगी । संभव अभियान के तीसरे चरण में कुपोषित गर्भवती और बच्चों को चिन्हित कर उन्हें भी स्वास्थ्य और पोषण सेवाओं से जोड़ना है ।


*पहली बार गईं अस्पताल*


महानगर के सिधारीपुर की निवासी संजीदा (25) पांच माह की गर्भवती हैं । उन्हें प्रसवपूर्व सेवाओं की जानकारी नहीं थी । एक कदम सुपोषण की ओर अभियान के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ता शमा परवीन ने उन्हें नजदीकी जिला महिला अस्पताल जाने के लिए प्रेरित किया । संजीदा ने बताया कि अस्पताल जाने पर आवश्यक जांचों के साथ उनका अल्ट्रासाउंड भी हुआ । उन्हें आयरन फोलिक और कैल्शियम की दवाएं दी गयी हैं और बताया गया कि दोनों दवाएं एक साथ नहीं खानी हैं । कैल्शियम दिन में और आयरन रात में खानी है। आयरन की टेबलेट चाय या कॉफी के साथ नहीं बल्कि नींबू पानी या संतरे के जूस के साथ ही लेनी है। उन्हें एक किलो चना, डेढ़ किलो दलिया और आधा किलो रिफाइन भी दिया गया है ।

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