डॉ.पारस वैद्य जी का सनातन धर्म और महाकुंभ दर्शन पर लिखा गया सुंदर गीत... आइए पढ़ते हैं..
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वेदों के अमृत का तुमको हम रसपान कराते हैं
आओ सनातन संस्कृति का माहात्म्य तुम्हें बतलाते हैं।
युग दृष्टा ऋषि मुनियों का
मानवता को उपहार है ये।
ये संस्कार है संतों का और
उच्च कोटि व्यवहार है ये।
चारों वेद पुराण अष्टदश सत की राह दिखाते हैं
आओ सनातन संस्कृति का माहात्म्य तुम्हें बतलाते हैं।
मातृ स्वरूपा गंगा यमुना
सरस्वती की धारा है।
प्रयागराज में इनका संगम
पावन तीर्थ हमारा है।
पुण्य चार धामों के सबको मोक्ष मार्ग ले जाते हैं
आओ सनातन संस्कृति का माहात्म्य तुम्हें बतलाते हैं।
देवाधिदेव शिव शंकर के
सब रूप सुमंगलकारी हैं।
द्वापर में दुख हरने वाले
कृष्ण बने गिरधारी हैं।
पुरुषोत्तम श्रीराम हमारे घर घर पूजे जाते हैं
आओ सनातन संस्कृति का माहात्म्य तुम्हें बतलाते हैं।
काशी मथुरा और अयोध्या
बड़े ही हमको प्यारे हैं।
रामायण गीता दोनों ही
जीवन आधार हमारे हैं।
अंधकार से हमें प्रकाशित पथ पर ये ले जाते हैं
आओ सनातन संस्कृति का माहात्म्य तुम्हें बतलाते हैं।
© Paras Vaidya

