टीबी उन्मूलन अभियान के तहत जागरूक किये गये विद्यार्थी

टीबी उन्मूलन अभियान के तहत जागरूक किये गये विद्यार्थी

गोरखपुर। जिला क्षय उन्मूलन अधिकारी डॉक्टर गणेश यादव और उनकी टीम ने जुबिली इंटर कालेज पहुंच कर वहां के विद्यार्थियों को बुधवार को जागरूक किया। उन्होंने इस मौके पर 100 दिवसीय टीबी उन्मूलन अभियान के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि साठ साल से अधिक उम्र के लोग, कुपोषित या कमजोर लोग, मधुमेह रोगी, धुम्रपान व नशा करने वाले, इलाज प्राप्त कर रहे टीबी रोगियों को निकट सम्पर्कियों, इलाज पूरा कर चुके टीबी रोगी, एचआईवी रोगी और मलिन बस्तियों में रहने वाले लोग उच्च जोखिम श्रेणी में आते हैं और उनमें टीबी की आशंका कहीं अधिक है । ऐसे लोगों की समय से जांच कर टीबी की पहचान होने पर सही से पूरा इलाज करवाया जाए तो यह पूरी तरह से ठीक हो सकती है, लेकिन अगर एक मरीज का समय से इलाज न हो तो वह साल भर में पंद्रह नये टीबी मरीज बना सकता है। इसके विपरीत उपचाराधीन टीबी रोगी से संक्रमण की आशंका कम होती है।

डॉ यादव ने बताया कि उच्च जोखिम वाले संभावित टीबी रोगियों को एक्स रे केंद्र और सीबीनॉट मशीन तक ले जाने के लिए 108 नंबर एम्बुलेस सेवा की भी सुविधा सरकारी खर्चे पर दी जा रही है। अलग अलग स्थानों पर भी कैम्प लगा कर जांच किये किये जा रहे हैं। अभियान के दौरान समाज के प्रभावशाली लोगों और धर्मगुरूओं की तरफ से जनसमुदाय से अपील भी की जा रही है। 

डॉक्टर यादव ने बताया कि टीबी आमतौर पर फेफड़ों में होती है लेकिन यह शरीर के अन्य अंगों में भी हो सकती है। दो हफ्ते से अधिक की खांसी, बुखार, रात में पसीना आना, मुहं से खून आना, सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, वजन कम होना, भूख न लगना, थकान और गर्दन में गिलटी या गांठें टीबी के प्रमुख लक्षण हैं। इस बीमारी की जांच और इलाज की सुविधा सरकारी खर्चे पर मौजूद है।

इस मौके पर डिप्टी डीटीओ डॉ विराट स्वरूप श्रीवास्तव, पीपीएम समन्वयक अभय नारायण मिश्रा, मिर्जा आफताब बेग, डीपीसी धर्मवीर प्रताप सिंह, डब्ल्यूएचओ कंसल्टेंट नाविल, इंद्रनील आदि प्रमुख तौर पर मौजूद रहे।

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