बस्ती: कठार जंगल के गौशाला का 117 वर्ष पूरा,स्थापना दिवस पर पूजन अर्चन
यूपी,बस्ती। जिले के कप्तानगंज क्षेत्र के श्री गौशाला कठार जंगल का 117 वां स्थापना दिवस के अवसर पर पूजन अर्चन का कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इस दिन भव्य मेला लगता है।
आचार्य द्वारा वेद मंत्रों से गौपूजन व पर्यावरण शोधक यज्ञ सम्पन्न कराया गया।
इस अवसर पर आर्य समाज बस्ती के यज्ञाचार्य अदित्यनारायन गिरि ने विधिवत गौपूजन कराते हुए यजमान रवि मिश्र द्वारा गौ ग्रास अर्पित किया गया।
साथ ही एडवोकेट घनश्याम अग्रहरि ने एक बोरी चोकर दान किया।
प्रबन्धक चन्द्रशेखर मिश्र ने बताया कि प्राचीन काल से इस अवसर पर लगने वाला विशाल मेला लोगों के गो प्रेम को दर्शाता है पर अब लोग केवल मेला देखने ही आते हैं कुछ पुराने लोग अभी भी आकर गायों को गुड़, फल या रोटी खिलाते हैं पर यह संख्या दिन प्रतिदिन घट रही है जबकि मेले का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं बल्कि गोपूजन में सम्मिलित होना व विद्वानों के विचारों को सुनना सहित गोपालन व संवद्धन हेतु सहायता करना है।
सन् 1905 में सन्यासी परमहंस दास जी महाराज द्वारा स्थापित यह गौशाला क्षेत्रवासियों के लिए गौरव का प्रतीक है।
उन्होंने मेले में आने वाले लोगों से गोपूजन में शामिल होने की व मुक्त हस्त से गौशाला हेतु सहयोग की अपील की है।
गौसंवर्द्धन हेतु वेद मंत्रों से आहुतियाॅ दिलाते हुए यज्ञाचार्य आदित्यनारायन गिरि ने बताया कि हम सबको गौमाता की सेवा तन मन धन से करनी चाहिए तभी हम खुशहाल होंगे।
गाय के बचने से ही गाॅव व कृषि बच सकेगी।
उन्होंने कहा कि गाय भारत की श्रद्धा है इसीलिए इसे माता व देवी कहते हैं।
बताया कि इसके दूध, घी, मूत्र तथा गोबर से प्रजा का पालन होता है तथा सन्तान से कृषि कार्य होता है।
गाय के घी से देवता पितर सब तृप्त होते हैं।
गाय का दूध व घी शीतकाल में अमृत तुल्य है अर्थराइटिस, गठिया, अरुचि, विषम ज्वर, मोटापा, बवासीर, सूजन, खाॅसी आदि रोगों को दूर करने में समर्थ है।
गाय के दूध में कैरोटीन नामक पीला पदार्थ होता है जो स्वर्ण अंश माना जाना है और आँखों की रोशनी बढ़ाता है। गोघृत जलाने से निकलने वाली गैस अशुद्ध वायु को अपनी ओर खींचकर शुद्ध करती है।
गाय का गोबर और गोमूत्र रासायनिक खादों का बेहतर विकल्प है इसका उपयोग करके अधिकाधिक उत्पादन भी किया जा सकता है तथा रोगमुक्त अन्न प्राप्त किया जा सकता है।
अयोध्या प्रसाद कसौधन अध्यक्ष व्यापार मंडल महसों ने कहा कि हमारे धर्मग्रन्थों के साथ गोरक्षा को भारत के सभी महापुरुषों ने श्रेष्ठ एवं सर्वोत्तम बताया है।
गोरक्षा एवं गोपालन करना मनुष्य मात्र का कर्तव्य है क्योंकि हमारे धर्मशास्त्रों में ‘गावो विश्वस्य मातरः’ कहकर इसके महत्व को स्वीकार किया गया है।
प्रबंधक चन्द्रशेखर मिश्र ने सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस कार्यक्रम में राम जियावन, दिलीप मिश्रा, राम नवल मिश्रा, गर्जन, धीरज, हरिराम सिंह, झिनकान चौधरी, राजाराम यादव, रामजीत यादव, राम शंकर, हरिशंकर त्रिपाठी, नीरज मिश्रा, राधेश्याम मिश्रा, सत्यनारायण मिश्रा, रमेश चंद्र मिश्रा, दीपक चौधरी, जगदीश मिश्रा, जय प्रकाश पांडे, सूर्य प्रकाश मिश्रा, प्रदीप गुप्ता सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।
