फाइलेरिया से बचाव का संदेश दे रहा है मरीज सहायता समूह
अगस्त में प्रस्तावित एमडीए अभियान के बारे में भी हो रही है चर्चा
पिपराईच ब्लॉक क्षेत्र में सक्रिय हैं आठ समूह
गोरखपुर। जिले के पिपराईच ब्लॉक क्षेत्र में सक्रिय फाइलेरिया मरीज सहायता समूह (पीएसजी) के सदस्य अपने गांव के लोगों को इस गंभीर बीमारी से बचाव का पाठ पढ़ा रहे हैं । साथ में लोगों को अगस्त में प्रस्तावित सर्वजन दवा सेवन (एमडीए) अभियान के बारे में भी बता रहे हैं । सभी को यह संदेश दे रहे हैं कि फाइलेरिया के कारण होने वाला हाथीपांव लाइलाज है । एक बार यह स्थिति आने के बाद इसे सिर्फ नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन ठीक नहीं किया जा सकता । अगर इस बीमारी से बचना है तो पांच साल तक लगातार साल में एक बार सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम के तहत दवा खाना अनिवार्य है ।
समूह की बैठकों में चर्चा होती है कि गांव के बाकी लोगों को इस बीमारी से बचाने के लिए जागरूक करना है। गांव में छोटे छोटे समूहों में बैठक कर संदेश दिया जाता है कि फाइलेरिया से बचाव के लिए घरों के आसपास साफ सफाई रखें, मच्छरदानी का प्रयोग करें और साल में एक बार दवा का सेवन अवश्य करें । यह दवा दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती और अति गंभीर तौर पर बीमार लोगों को छोड़ कर सभी को ड्रग एडमिनिस्ट्रेटर के सामने ही खानी है । खाली पेट दवा का सेवन नहीं करना है।
इन गांवों में चल रहा है समूह
जिला मलेरिया अधिकारी अंगद सिंह ने बताया कि पिपराईच ब्लॉक के उसका, महराजी, सरण्डा, सिंहौली दूबौली, भैंसहा, कुसम्ही कोठी और महमूदाबाद में मरीज सहायता समूह चल रहे हैं । जिन गांवों में मरीजों की संख्या अधिक होती है उसे फाइलेरिया की दृष्टि से संवेदनशील मानते हुए समूह का गठन किया जाता है । समूह के सदस्य गांव के स्कूल, कोटेदार, सामूहिक बैठकों में अपनी पीड़ा को बयां कर बचाव के लिए प्रेरित कर रहे हैं । समूह के क्षमता संवर्धन में पाथ और सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च संस्थाएं सहयोग दे रही हैं। समूह के लोगों को हाथीपांव प्रबन्धन के बारे में जानकारी और एमएमडीपी किट भी दी जाती है । समूह के लोगों और उनकी मदद से आने वाले हाइड्रोसील के मरीजों की सरकारी प्रावधानों के अनुसार पिपराईच सीएचसी पर सर्जरी कराई जा रही है ।
जिले में हाथीपांव की स्थिति
जिला मलेरिया अधिकारी ने बताया कि जिले में इस समय हाथीपांव के 1988 मरीज हैं । हाइड्रोसील के 579 मरीज हैं। इसमें 547 की सर्जरी हो चुकी है। पिछले साल मई में एमडीए के दौरान 79.88 फीसदी लोगों ने फाइलेरिया से बचाव की दवा खाई थी। कुल 32013 लोगों ने दवा खाने से इनकार कर दिया था। इस बार मरीज सहायता समूह और सामुदायिक सहयोग से 90 फीसदी से ज्यादा लोगों को दवा खिलाने का प्रयास होगा।



